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What Is HTTP/3 – Lowdown on the Fast New UDP-Based Protocol

गूगल का नया प्रोटोकॉल क्या है यह झमेला 
गूगल का नया प्रोटोकॉल क्या है यह झमेला
गूगल का नया प्रोटोकॉल क्या है यह झमेला 
                                         इस पोस्ट में आप  गूगल  के नए प्रोटोकॉल के बारे जानेगें 

क्या है इंटरनेट प्रोटोकोल


प्रोटोकॉल का मतलब है ऐसे नियम, जिनका पालन करते हुए इंटरनेट और कंप्यूटर की दुनिया में संकेतों का आदान-प्रदान होता है। एचटीटीपीएस ऐसा प्रोटोकॉल है जिसमें इंटरनेट के जरिए भेजे जाने वाले संकेतों को एंक्रिप्ट किया जाता है। इन संकेतों को बीच में पढ़ने या छोड़ने की आशंका नहीं होती। कौन करना चाहेगा ऐसा यह है आपके कंप्यूटर से लेकर उस वेबसाइट के सर्वर के बीच तमाम स्तरों पर मौजूद लोग। आपके कंप्यूटर से जब संकेत भेजा जाएगा तो वह पहले उस इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी( एयरटेल, जिओ आदि) के इंफ्रास्ट्रक्चर से होते हुए गुजरेगा जिससे आपने इंटरनेट कनेक्टिविटी ली हुई है। इसी तरह दूसरी तरफ वेबसाइट होस्ट करने वाली कंपनी भी बीच में आती है। और फिर रास्ते में आते हैं हैकर, जो ऐसे संकेतों को बीच में ही पढ़ने की कोशिश करते हैं।एचटीटीपीएस प्रोटोकॉल के जरिए इन्हें ऐसे संकेतों में बदल दिया जाता है, जिन्हें कोई और नहीं पढ़ना समझ सकता। आपने कोई वेबसाइट के वेब पते के शुरू में एचटीटीपीएस (https://www.freegooglenotes.com) लिखा देखा होगा। यह वेबसाइट इस प्रोटोकॉल का पालन करती हैं।

गूगल और मोजिला अपने वेब ब्राउजर में एक नए इंटरनेट, प्रोटोकॉल के इस्तेमाल की योजनाओं को लेकर विवाद में हैं। गूगल का वेब ब्राउजर है क्रोम और मोजिला का फायरफॉक्स। ये दोनों डीएनएस ओवर एचटीटीपीएस नामक नए इंटरनेट प्रोटोकॉल के विकास को बढ़ावा दे रहे हैं। अमेरिकी संसद की न्यायिक समिति ने आशंकाओं के चलते गूगल से इस पर जवाब तलब किया है। मगर मामला है क्या? 
डीएनएस का मतलब : डीएनएस का मतलब है डोमेन नेम सर्वर। इंटरनेट पर मौजूद किसी भी कंप्यूटर, वेबसाइट या सेवा का एक एड्रेस या पता होता है, जिसे आइपी एड्रेस कहते हैं। यह चार अलग-अलग अंक-समूहों को जोड़कर बनाया जाता है, जिनके बीच में डॉट का प्रयोग किया जाता है। मान लीजिए freegooglenotes.com का आइपी एडेंस xx.xx.xxx.xxx है। freegoolenotes की वेबसाइट पर पहुंचने के लिए आप अपने ब्राउजर (जैसे क्रोम) की एड्रेस बार में यह अंक लिख सकते हैं लेकिन सैकड़ों वेबसाइट्स के एड्रेस याद रखना असंभव है, इसलिए इन्हें एक याद रखने योग्य नाम दे दिया गया है, जिसे डोमेन नेम कहते हैं, जैसे- freegooglenotes.com। ब्राउजर में freegooglenotes.com लिखने पर आपकी जानकारी के बिना, पीछे ही पीछे, यह पता एक डीएनएस रिजॉल्वर को भेजा जाता है, जो बताता है कि इस नाम के साथ xx.xx.xxx.xxx नामक आइपी एड्रेस जुड़ा है। यह जानकारी मिलने पर आपका ब्राउजर उस आइपी एडेस पर मौजूद वेबसाइट को खोल लेता। रास्ते में जो डीएनएस रिजॉल्वर आया, वह आपके इंटरनेट सेवा / प्रदाता या किसी दूसरे तकनीकी संस्थान के सर्वर पर मौजूद हो सकता है।


क्या है गूगल की कोशिश: अब तक यह व्यवस्था थी जिसे गूगल बदलने की कोशिश कर रहा है, कम से कम अपने क्रोम ब्राउजर में, जिसका विश्व के ब्राउजर बाजार में 63 फीसदी हिस्सा यानी दबदबा है। वह डीएनएस ओवर एचटीटीपीएस नामक नया. प्रोटोकॉल ला रहा है, जिसमें डाटा एनक्रिप्ट किया जाएगा। इतना ही नहीं, क्रोम ब्राउजर सीधे ही गूगल द्वारा निर्धारित डीएनएस सर्वर से सूचनाएं प्राप्त कर लेगा। रास्ते में किसी और की भूमिका नहीं रहेगी यानी रिजॉल्वर और पारंपरिक डीएनएस सर्वरों की भूमिका खत्म। गूगल के मुताबिक, इससे लोगों का डाटा ज्यादा सुरक्षित होगा, क्योंकि बीच में कोई उसे एक्सेस नहीं कर सकेगा, लेकिन इसका दूसरा अर्थ यह हुआ कि सबका
डाटा गूगल की पहुंच में होगा। यहां उसका एकाधिकार होगा, जिसका उसे अन्य आइटी कंपनियों की तुलना में अनुचित लाभ मिलेगा। इंटरनेट सेवा प्रदाता और डीएनएस सर्विस देने वालों को नुकसान होगा, जो अभी इस डाटा का कई तरह से उपयोग करते हैं। डर . यह भी है कि तब सरकारों, अदालतों आदि द्वारा वेबसाइट्स आदि को प्रतिबंधित किए जाने जैसे आदेश लागू करना मुश्किल हो जाएगा, जिनका पालन इंटरनेट सेवा प्रदाता के माध्यम से किया जाता है। माता-पिता के लिए भी गलत वेबसाइट, एप्स आदि से अपने बच्चों को सुरक्षित रखना मुश्किल होगा, क्योंकि क्रोम ब्राउजर और गूगल समर्थित डीएनएस सर्वर के बीच में दखल की गुंजाइश नहीं होगी।

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