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रेपो रेट में एक और कटौती

रेपो रेट में एक और कटौती
रेपो रेट में एक और कटौती
रेपो रेट में एक और कटौती

इस पोस्ट में आप रेपो रेट रिडक्शन की  बारे में पढ़ पाएंगे  और जानकारी  ले सकतें है | 

आरबीआई ने रेपो रेट 25 आधार अंक घटाया, विकास दर को गति देना मकसद 
आर्थिक सुस्ती की चुनौती को दूर करने में जुटी केंद्र सरकार के साथ आरबीआई भी कंधे से कंधा मिला कर खड़ा है। मौद्रिक नीति की समीक्षा करते हुए आरबीआई गवर्नर डॉक्टर शक्तिकांत दास ने रेपो रेट ( जिस रेट पर केंद्रीय बैंक अल्पकालिक अवधि के लिए बैंकों को राशि उपलब्ध कराता है ) मैं 25 आधार अंकों की कटौती कर इसे करीब 10 वर्षों के न्यूनतम  स्तर 5.15 फीसद पर ला दिया है। इसके साथ ही बैंक ने कहा है कि अब ग्राहकों को एनईएफटी यानी इलेक्ट्रॉनिक एंड ट्रांसफर की सुविधा 24 घंटे मिलेगी। वर्तमान में यह सुविधा बैंक के कार्य दिवसों के दौरान शाम 7:00 बजे तक मिलती है। इस सुविधा की शुरुआत दिसंबर से होगी।
आरबीआई गवर्नर दास ने पिछली 5 समीक्षाओं में 5 बार में रेपो रेट में कुल मिला कर 1.35 फीसद की कटौती की है। गवर्नर पद संभालने के बाद जितनी दफे उन्होंने मौद्रिक समीक्षा पेश की है उतनी दफे ब्याज दरों को उठाने का रास्ता साफ किया है।  चालू वित्त वर्ष के दौरान आर्थिक विकास दर के लक्ष्य को भी 6.9 फीसद से घटाकर 6.1 फीसद किया है।

शुक्रवार को रेपो रेट में कटौती का सीधा फायदा होम लोन या ऑटो लोन लेने वाले ग्राहकों को मिलना तय है ,  क्योंकि तकरीबन सारे बैंक अपनी कर्ज की दरों को रेपो रेट से लिंक कर चुके हैं। रेपो रेट की इतनी कम दर इसके पहले दिसंबर,  2010 में तब थी जब यह 5 फीसद के स्तर पर था। तब भी भयंकर वैश्विक मंदी की काट खोजने के लिए आरबीआई की तरफ से ब्याज दरों में भारी कटौती की गई थी। लेकिन इस बार की कटौती का मकसद घरेलू मांग में वृद्धि करते हुए मंदी को दूर करना है। पिछली चार मौद्रिक नीति समीक्षाओं में रेपो रेट में 1.10 फीस की कटौती की गई थी,  लेकिन उसका पूरा फायदा ग्राहकों को नहीं मिला। केंद्रीय बैंक ने भी इस पर नाराजगी भी जताई है। रेपो रेट घटाकर बैंकों को सस्ते कर्ज के लिए प्रोत्साहित करने के पीछे वजह भी यही है कि घरेलू अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ाई जा सके। इसके त्योहारी सीजन में ऑटोमोबाइल, हाउसिंग, उपभोक्ता सामान सेक्टर पर सकारात्मक असर पड़ने के आसार हैं। वैसे भी कुछ दिन पहले ही सरकारी व निजी क्षेत्र के बैंकों ने देशभर में कर्ज आसानी से देने के लिए तरह तरह के कार्यक्रमों का ऐलान किया है। देश के 226 जिलों में सरकारी क्षेत्र के बैंकों ने उपभोक्ता कर्ज वितरित करने के लिए खास अभियान शुरू किया है
सस्ता मिलेगा लोन
आर्थिक माहौल दुरुस्त करने कि आरबीआइ की एक और कोशिश                                             

अब सारा दारोमदार बैंकों पर कई बैंकों के कर्ज महीने से हो गए हैं रेपो रेट आधारित 

मौद्रिक नीति समीक्षा की मुख्य बातें

25 आधार अंकों की कटौती के बाद रेपो रेट 5.15 फीसद पर आया

त्योहारी सीजन में ऑटो,  होम लोन की दरों में कटौती तय

आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.9 से घटाकर 6.1 फीसद किया
काबू में रहेगी महंगाई,  अधिकतम 3.7 फीसद रहेगी महंगाई दर
विदेशी मुद्रा भंडार 21.7 अरब डॉलर बढ़ कर 434.6अरब डॉलर
माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के लिए कर्ज की सीमा 1.25 लाख रुपए

आरबीआई ने घटाया विकास दर का अनुमान
चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी विकास दर अनुमान 6.9 से घटाकर 6.1फीसद किया
इकोनामी के समक्ष मौजूदा चुनौतियों को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष  (2019-20) के लिए जीडीपी विकास दर का अनुमान घटा दिया है। रिजर्व बैंक का मानना है कि ताजा हालात में इस वित्त वर्ष जीडीपी की विधि दर सिर्फ 6.1 परसेंट रहेगी। अभी तक आरबीआई को  जीडीपी में 6.9 पर्सेंट वृद्धि दर की उम्मीद थी। हालांकि केंद्रीय बैंक ने माना है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही (अक्टूबर, 2019-मार्च, 2020) से आर्थिक विकास के मोर्चे पर सुधा देखने शुरू हो जाएंगे।

इकोनॉमी को लेकर आरबीआई का आकलन इसलिए मैं महत्वपूर्ण है क्योंकि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी की ग्रोथ पांच परसेंट रही थी,  जो 6 वर्षों का निचला स्तर है। इकोनामी की रफ्तार में धीमे पन की मुख्य वजह मांग में कमी को माना गया। इस स्थिति में से निकलने के लिए सरकार ने कॉरपोरेट्स टैक्स में सीधे 10 परसेंट की बड़ी कटौती जैसे कदम उठाए हैं। इसके अतिरिक्त बैंकों में अतिरिक्त  70 हजार करोड़ रुपए के पूंजी निवेश के साथ- साथ सरकारी बैंकों के विलय जैसा निर्णय भी लिया गया। रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को जारी अपनी नीतिगत रिपोर्ट में माना है कि सरकार के इन प्रयासों के चलते अब आने वाली प्रत्येक तिमाही में आर्थिक विकास की दिशा में सुधार दिखेगा। बैंक मानता है कि इन सुधारों के चलते अगले वित्त वर्ष में आर्थिक विकास की दर सात परसेंट रहने की उम्मीद है। जीडीपी की ग्रोथ रेट के अनुमान में बड़ी कमी की वजह बताते हुए रिजर्व बैंक ने कहा है कि निजी निवेश और खपत दोनों में फिलहाल सुधार नहीं हुआ है। दूसरी तरफ वैश्विक मंदी के चलते निर्यात भी अपनी स्वाभाविक रफ्तार खो चुका है। इसे देखते हुए बैंक ने चालू वित्त वर्ष के 6.1% जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान लगाया है।

बैंक का मानना है कि दूसरी तिमाही में आर्थिक विकास की दर 5.3,  तीसरी तिमाही में 6.6 परसेंट और चौथी तिमाही में 7.2 पर्सेंट रहने का अनुमान है। आर्थिक विकास को लेकर रिजर्व बैंक की सोच में सकारात्मकता भी है। बैंक का मानना है कि अगस्त 2 सितंबर में सरकार की तरफ से किए गए उपाय निवेश और मांग में वृद्धि करने में सहायक होंगे। एफडीआई नीति में सुधा जैसे उपाय भी निवेश बढ़ाने में मदद करेंगे। हालांकि आरबीआई ने इस बात पर अफसोस जताया है कि कॉरपोरेट सेक्टर क्षमता विस्तार को लेकर निवेश संबंधी कदम नहीं उठा रहे हैं।
फैसले का  चौतरफा हो रहा स्वागत
वित्त मंत्रालय,  बैंक और उद्योग जगत  ने आरबीआई के इस फैसले का स्वागत किया है। वित्त मंत्रालय ने कहा है कि
हाल के दिनों में केंद्र सरकार की तरफ से विकास दर को तेज करने के लिए जो कदम उठाए गए हैं,  उसे केंद्रीय बैंक का
फैसला और प्रभावशाली बनाएगा। केंद्रीय बैंक ने इस वर्ष 23 अगस्त के बाद से बैंक विलय, कॉरपोरेट टैक्स घटाने और
रियल एस्टेट के लिए अलग फंड बनाने समेत कई कदम उठाए हैं। उधर, फिक्की, सीआईआई,  एसोचैम समेत तमाम
उद्योग चैबरो ने कहा है कि इससे निवेश का माहौल गाने में मदद मिलेगी। सीआईआई के महासचिव चंद्रजीत बनर्जी
ने कहा है कि 1 वर्ष के भीतर ब्याज दरों में 135 आधार अंकों की कटौती से कॉरपोरेट सेक्टर उत्साहित है।


शेयर बाजारों को रास नहीं आई विकास दर अनुमान में कटौती
बैंकिंग स्टॉक्स पर जबरदस्त दबाव के चलते शुक्रवार को लगातार पांचवे सत्र में प्रमुख भारतीय शेर बाजारों में गिरावट का दौर है। आरबीआई ने शुक्रवार को चालू वित्त वर्ष के लिए विकास दर अनुमान घटा दिया। इसके बाद दिन के कारोबार में बीएसई का 30  शेयरों वाला सेंसेक्स 433.56 अंक की गिरावट के साथ 37,6 73.31 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी भी 139.25 अंक की गिरावट के साथ 11,174.75 पर बंद हुआ। सेंसेक्स में सबसे बड़ी गिरावट कोटक बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, टाटा मोटर्स, एलएंडटी, एसबीआई, टाटा स्टील और एक्सिस बैंक के शेयरों में देखी गई। इन कंपनियों के शेयर 3.46 परसेंट तक गिरावट के साथ बंद हुआ। वही टीसीएस, इंफोसिस, ओएनजीसी, टेक महिंद्रा, इंडसइंड बैंक और एनटीपीसी के शेयरों में 1.03 परसेंट तक का उछाल दर्ज किया गया। शुक्रवार को सेंसेक्स 300 अंक की बढ़त के साथ खुला, लेकिन आरबीआई द्वारा की गई घोषणाओं के बाद बाजार में तेज गिरावट देखी गई।

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