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how to secure android phone from hackers

स्मार्टफोन हर किसी के लिए उपयोगी है,लेकिन इसके इस्तेमालका सही तरीका पता न हो,तो फिर बड़ी चपत लग सकती है।आइए जानते हैं स्मार्टफोन में क्या डाउनलोड करें और क्या नहीं...?असावधानी से न लगे बड़ी चपत




टेक गाइड 
तेज इंटरनेट आने के बाद से बहुत कुछ बदल गया है। जो चीज
सबसे ज्यादा बदली है वह है
लाइन में लगने की आदत। पहले रेल टिकट से लेकर स्कूल की फीस और बिजली बिल तक जमा करने के लिए लंबी लाइन होती थी, लेकिन आज बस फोन उठाया
और सब काम हो गया। यहां तक की बैंक की लाइन भी आज इंटरनेट और मोबाइल की वजह से छोटी हो गई है। घर बैठे ही सारा काम हो जाता है। छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी खरीदारी तक आज मोबाइल के जरिए आसानी से की जा रही है। सचमुच सबकुछ बदल गया है। हालांकि ये सारी चीजें सुनने में तो बहुत अच्छी लगती हैं, लेकिन कहते हैं न कि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। तो यह एक ही हिस्सा है। पहला हिस्सा सुनने में जितना अच्छा लग रहा है दूसरा उतना ही डरावना है। जी हां, इंटरनेट और मोबाइल के खतरों से भी आपको अवगत होना जरूरी है, क्योंकि जिस तरह के मामले सामने आ रहे हैं वे काफी भयावह हैं।

सावधान रहने की जरूरत : हाल में दिल्ली के एक व्यवसायी खाते से

18 लाख रुपये का फ्रॉड हुआ। जिस तरह से सकारनामे को अंजाम

दिया गया, उसे सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। सिर्फ व्यवसायी का

सिम स्वैप कर इसे किया गया था। किसी को कानों-कान खबर भी

नहीं हुई। मामला तब प्रकाश में आया, जब वह बैंक गया। अब पुलिस

केस हुआ है, लेकिन पैसा मिल जाए इसकी कोई गारंटी नहीं।

मोबाइल और इंटरनेट पर आज धोखाधड़ी के मामले हर रोज सुनने को

मिलते हैं। यह किस्सा इतना बड़ा है कि आरबीआइ तक को इसे लेकर

लोगों को चेतावनी जारी करनी पड़ी। आपको बता दें कि धोखाधड़ी के

ज्यादातर मामलों में खुद यूजर की गलती होती है। थोड़ी सी लालच

और लापरवाही के चक्कर में आकर वे अपना बड़ा नुकसान

कर लेते हैं। आज भले ही यहचपत दिल्ली के

एक व्यवसायी को लगी हो, लेकिन यदि आप सजग नहीं होते हैं,
तो कल आपकी भी बारी आ सकती है और
 धोखा सिर्फ सिम बदलने से ही नहीं, 7 बल्कि एप, ईमेल और न फर्जी कॉल के जरिए भी
होता है।

एप्स, जिनसे बचना है जरूरी :सबसे पहले पहचान करते हैं,

उन एप्स की जो बेहद खतरनाक हैं और इन पर कई बार चोरी और

हैकिंग के आरोप लगते आए हैं।


स्पीड बूस्टर से रहें सावधान : इंटरनेट या एप के उपयोग के दौरान अक्सर आपके फोन में इंटरनेट स्पीड बूस्ट और बैटरी बैकअप बेहतर करने वाले एप्स के नोटिफिकेशन आते होंगे, लेकिन आपको बता दें कि ये स्पीड बूस्टर और बैटरी बूस्टर
एप बिल्कुल बेकार हैं। कोई भी एप नेटवर्क स्पीड नहीं बढ़ा जि सकता। यह आपको झांसे में लेकर फोन में आ जाते हैं और शा फिर चुपचाप बैठकर डाटा चोरी करते हैं। इसलिए सबसे पहले इन एप्स को अनइंस्टाल करें, जैसे- स्पीड बूस्टर, क्लीन ड्रायड, बैटरी सेवर आदि।

एंटीवायरस एप भी फैलाते हैं वायरस: जिस तरह से आज । इंटरनेट पर वायरस का खतरा है, उसे देखते हुए लोग अपने है फोन में एंटीवायरस एप रखना बहुत जरूरी समझते हैं। यह

काफी हद तक सही भी है, लेकिन यदि आप सही एंटीवायरस एप का चुनाव नहीं करते हैं, तो फिर ये एप आपके लिए खतरा बन जाते हैं। एंटीवायरस के नाम पर कई एप प्ले स्टोर पर हैं, जो काफी खतरनाक हैं। इनके बारे में पहले भी चेतावनी जारी की जा चुकी है, जैसे-एंटीवायरस क्लीन, एंटीवायरस सिक्योरिटी फ्री, एंटीवायरस क्लीनर फॉर एंड्रॉयड सिक्योरिटी, एंटीवायरस सिक्योरिटी, एंटीवायरस फ्री और टीवी एंटीवायरस फ्री आदि।
यदि एंटीवायरस एप का उपयोग करना ही चाहते हैं, तो फिर कैसपरस्की, मैकफी
और अवास्त जैसे एप का उपयोग करें, जो काफी सालों से हैं।

 एप लॉकर से भी रहें सावधान: आप अतिरिक्त सुरक्षा के लिए कई

सिक्योरिटी एप डाउनलोड करते हैं, जिनमें एप लॉकर भी हैं।

ये एप्स फोन को नहीं, बल्कि एप्स को लॉक करते हैं,
ताकि किसी और के हाथ आपका फोन लग भी गया तो वह
आपके पर्सनल एप का उपयोग नहीं कर पाएगा।
लेकिन ये एप्स लॉकर आपसे एप
और फोन का पासवर्ड ले लेते हैं और चोरी करते रहते हैं।

हाल में कई एप लॉकर एप्स सवाल के घेरे में आए हैं,
जिनमें एपलॉक प्राइवेसी प्रोटेक्टर जैसे बड़े एप भी र शामिल हैं।
आपको इन एप्स से भी सावधान रहना चाहिए।

ईमेल और मैसेज का जाल : अक्सर आपको ईमेल आर

मैसेज आता है, जिसमें कहा जाता है कि आपकी लॉटरी निकल गई है।
इसके अलावा, भारी ऑफर, कैश बैंक,
एकाउंट में इतने रुपये क्रेडिट हो गए जैसी बातें की जाती है।
लॉटरी की रकम इतनी ज्यादा होती है कि आप
बिना सोचे समझे इसके चक्कर में फंस जाते हैं। बस उस मेल या
मैसेज पर क्लिक किया और आप फंस गए। क्लिक करत ही वायरस

आपके फोन में चले जाते हैं और फिर वे अपना काम शुरू कर देते हैं।
हैकर्स आपके फोन की सारी जानकारी रिमोटली एक्सेस कर लेते हैं।
इसलिए इन मैसेज पर भूल कर भी विश्वास न करें। कोई भी फ्री में
कुछ नहीं देता है। यहीं से आपकी मेल आइडी और नेट बैंकिंग की
हैकिंग शुरू होती है।

फेक कॉलिंग: फेक कॉलिंग का आलम यह है कि

ट्राईऔर आरबीआइ जैसी सरकारी संस्थानों को भी इसे लेकर
चेतावनी जारी करनी पड़ी है। फर्जी कॉलें लोगों को आती हैं, जिनमें
उनके एटीएम कार्ड और बैंक की सिक्योरिटी को लेकर डरा दिया जाता
है। डराने के बाद सुरक्षा का भरोसा देकर बैंक की जानकारी मांगी
जाती है। डर इतना ज्यादा भर दिया जाता है कि आप जानकारी
दे देते हैं और फिर थोड़ी ही देर में आपका बैंक एकाउंट खाली हो
जाता है। हाल में भारत की प्रमुख वॉलेट सर्विस प्रदाता कंपनी पेटीएम
ने भी इस बारे में अपने यूजर्स को सख्त चेतावनी दी है। कंपनी ने
अपने यूजर्स को कहा है कि एनीडेस्क और टीम व्यूअर क्विक सपोर्ट
जैसे एप को अपने फोन में इंस्टॉल न करें। इसके माध्यम से
जालसाज आपके एकाउंट से पैसे चुरा सकते हैं। पेटीएम के बाद
भारत के प्रमुख बैंको ने भी अपने यूजर्स को ऐसी चेतावनी जारी की है।
हालांकि आपको बता दें कि एनीडेस्क और टीम व्यूअर क्विक
सपोर्ट जैसे एप काफी उपयोगी हैं। अक्सर सॉफ्टवेयर इंजीनियर
रिमोटली कंप्यूटर या लैपटॉप ठीक करने के लिए इसका उपयोग
करते हैं। इसे किसी डिवाइस की पूरी स्क्रीन और मेमोरी तक को
दूसरे डिवाइस से एक्सेस किया जा सकता है। वहीं, अब मोबाइल
के लिए भी इसका सपोर्ट उपलब्ध है। लेकिन हैकर्स अब इसका
उपयोग धोखाधडी के लिए कर रहे हैं। बैंकों द्वारा केवाईसी करने
के नाम पर इस एप को फोन में इंस्टॉल करा लेते हैं। झांसे में आकर यूजर्स इंस्टॉल कर लेते हैं और अपने मोबाइल का एक्सेस दूसरे को दे देते हैं। इसी का फायदा उठाकर हैकर्स लोगों के एकाउंट से पैसे उड़ा लेते हैं। अब आप समझ सकते हैं कि यदि मोबाइल का उपयोग कर रहे हैं, तो आपको सावधान रहने की जरूरत है। कॉल हो, मैसेज हो या फिर एप किसी पर भी भरोसा नहीं करना है। अपरिचित लोगों की बातों पर भरोसा नहीं करनी चाहिए, बिना काम के मैसेज या ईमेल को क्लिक नहीं करना है और बिना काम वाले एप्स को डाउनलोड नहीं करना चाहिए।




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